पुजारी | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

सोहन प्रसाद रोज सुबह जागने के बाद सबसे पहले अपनी माँ के पैर छूते थे । उसके बाद ही वे कोई दूसरा काम करते थे । उनकी आदत थी कि वे बिना स्नान किये भोजन तो दूर, नाश्ता भी नहीं करते थे । सोहन जी बुद्धपुर गाँव के निवासी थे, जो गाजीपुर और चंदौली की … आगे पढें

अधिकार | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

आंबेडकर पार्क में बेंच पर बैठा एक युवक बार-बार अपनी मोबाइल की स्क्रीन पर समय देख रहा था । बीच-बीच में वह पार्क के मुख्य द्वार की ओर भी देख लेता था । वह मुख्य द्वार के सामने पार्क की चारदिवारी के पास लगी बेंच पर उत्तर की ओर मुँह करके बैठा हुआ था । … आगे पढें

दलित, पददलित और महादलित की अवधारणा बनाम “हम दलित नहीं”

भारतीय समाज में वंचित समुदायों की पहचान को लेकर अनेक शब्द प्रचलित हुए हैं। इनमें “पददलित”, “दलित” और “महादलित” प्रमुख हैं। इन शब्दों को सामान्यतः सामाजिक न्याय, प्रतिरोध और मुक्ति की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। किंतु किसी भी अवधारणा का मूल्यांकन केवल उसके ऐतिहासिक उपयोग से नहीं, बल्कि उसके वैचारिक परिणामों से किया … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : YouTube चैनल के गीत

‘आंबेडकरवादी साहित्य’ (AMBEDKARVADI SAHITYA) बुद्ध-धम्म और आंबेडकरवादी विचारधारा से संबंधित साहित्य, गीत, कविताओं, नाटकों तथा अन्य रचनात्मक सामग्री का YouTube चैनल है। चैनल का उद्देश्य आंबेडकरवादी साहित्य और विचारधारा से संबंधित रचनाओं को व्यापक पाठक एवं दर्शक समुदाय तक पहुँचाना है। ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ चैनल पर प्रकाशित गीतों में तथागत बुद्ध और उनका धम्म, बाबा साहेब … आगे पढें

एक महाकवि : दो मुलाकातें | संस्मरण

मनुष्य अपने जीवनकाल में बहुत से व्यक्तियों से मिलता है, किंतु वह कुछ ही व्यक्तियों के व्यक्तित्व से प्रभावित होता है । एक कवि के रूप में मेरी पहचान दसवीं कक्षा में पढ़ते समय ही बन गयी थी । तब से लेकर अब तक न जाने कितने कवियों से मैं मिल चुका हूँ । किंतु … आगे पढें

संत रविदास के काव्य में बौद्ध चिंतन

संतकवि रविदास जी के जीवन परिचय और उनकी विचारधारा के विषय में विद्वानों में पर्याप्त मतभेद है । हिंदू विद्वान उन्हें एक हिंदू भक्त के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि बौद्ध विद्वान उन्हें बौद्ध विरासत का पुरोधा कहते हैं । संत रविदास जी के पंथ का अनुसरण करने वाले लोग उनके नाम पर ‘रविदासिया … आगे पढें

आंबेडकरवाद : दिशा एवं दृष्टि 

आंबेडकरवाद के संदर्भ में भ्रमित लोगों के भ्रम-निवारण हेतु ही ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका के इस तृतीय अंक का विषय ‘आंबेडकरवाद : दिशा एवं दृष्टि’ रखा गया है । आंबेडकरवाद को सम्यक रूप में समझने के लिए सर्वप्रथम ‘वाद’ का आशय समझना अनिवार्य है । शब्दकोश के अनुसार ‘वाद’ का अर्थ है, “वह दार्शनिक सिद्धांत, जिसके … आगे पढें

अस्पृश्यता, जातिगत भेदभाव, डॉ० आंबेडकर और बौद्ध धम्म

हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा । अल्लामा इक़बाल के इस शेर का वाच्यार्थ यह है कि अपनी सुंदरता से अनजान नरगिस (एक प्रकार का फूल) हजारों सालों तक अपनी बेनूरी (अंधेपन) पर रोती रहती है कि मुझमें कोई गुण, आकर्षण या सुन्दरता नहीं … आगे पढें