पुजारी | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

सोहन प्रसाद रोज सुबह जागने के बाद सबसे पहले अपनी माँ के पैर छूते थे । उसके बाद ही वे कोई दूसरा काम करते थे । उनकी आदत थी कि वे बिना स्नान किये भोजन तो दूर, नाश्ता भी नहीं करते थे । सोहन जी बुद्धपुर गाँव के निवासी थे, जो गाजीपुर और चंदौली की … आगे पढें

अधिकार | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

आंबेडकर पार्क में बेंच पर बैठा एक युवक बार-बार अपनी मोबाइल की स्क्रीन पर समय देख रहा था । बीच-बीच में वह पार्क के मुख्य द्वार की ओर भी देख लेता था । वह मुख्य द्वार के सामने पार्क की चारदिवारी के पास लगी बेंच पर उत्तर की ओर मुँह करके बैठा हुआ था । … आगे पढें

आंबेडकरवादी कहानी की सम्यक परंपरा

लीक-लीक गाड़ी चले, लीकहिं चले कपूत । लीक छाँड़ि तीनों चलें, शायर सिंह सपूत ।। भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का उक्त दोहा परंपरा का अंधानुकरण न करने की सीख देता है । ध्यातव्य है कि न तो हर पुरानी परंपरा गलत होती है और न ही हर नयी परंपरा सही होती है । क्योंकि नयी परंपरा … आगे पढें