आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन | संपादकीय

समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य पुस्तकें | मूल्य सूची और ऑर्डर

📚 आंबेडकरवादी साहित्य — पुस्तकें उपलब्ध ये केवल पुस्तकें नहीं, वैचारिक हस्तक्षेप हैं। स्पष्ट विचार, तर्क और सामाजिक समझ के लिए आवश्यक पाठ। 📖 उपलब्ध पुस्तकें: 1. गुरु रविदास पचासा — ₹25 2. धम्म-चर्चा — ₹30 3. धम्म अधम्म सद्धम्म — ₹100 4. आडंबर-मिशन — ₹100 5. आंबेडकर का मिशन और समकालीन भारत — ₹120 … आगे पढें

आडंबर-मिशन पुस्तक | आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन

📚 आडंबर-मिशन यह पुस्तक समाज में फैले आडंबर, दिखावे और मिथ्या आस्थाओं की संरचना को सीधे चुनौती देती है। यहाँ आडंबर केवल धार्मिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना को भ्रमित करने वाला एक संगठित तंत्र है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि किस प्रकार आडंबर मनुष्य को तर्क से दूर करता है और वास्तविक सामाजिक … आगे पढें

धम्म-चर्चा पुस्तक | आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन

📚 धम्म-चर्चा यह पुस्तक धम्म को केवल बताती नहीं, बल्कि उसे स्पष्ट करती है, खोलती है और जीवन से जोड़ती है। यहाँ धम्म किसी आडंबर या कल्पना का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक-संवैधानिक समझ का आधार है। यह पुस्तक उन भ्रमों को तोड़ती है जिनके कारण धम्म को सीमित, कमजोर या गलत रूप में प्रस्तुत किया … आगे पढें

धम्म-चर्चा अभियान : विचार से व्यवस्था तक

धम्म-चर्चा कोई सामान्य गतिविधि नहीं है। यह एक संगठित वैचारिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य धम्म को जीवन, समाज और संविधान के साथ जोड़कर समझना और स्थापित करना है। यहाँ धम्म केवल कहा नहीं जाता, बल्कि उसे खोला जाता है, परखा जाता है और व्यवहार में उतारने की दिशा दी जाती है। धम्म-चर्चा अभियान का मूल … आगे पढें

हिंदी के आंबेडकरवादी कवि और आलोचक : एक स्पष्ट वैचारिक सूची

आंबेडकरवादी साहित्य केवल एक साहित्यिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार-दर्शन पर आधारित एक स्पष्ट वैचारिक साहित्यिक धारा है। इसका मूल आधार सामाजिक न्याय, समता, मानव गरिमा और वैज्ञानिक दृष्टि है। इस साहित्य की पहचान किसी जातीय या भावनात्मक आग्रह से नहीं, बल्कि आंबेडकरवादी वैचारिक प्रतिबद्धता से निर्धारित होती है। हिंदी में आंबेडकरवादी … आगे पढें

आंबेडकरवाद : दलित-विमर्श से व्यापक वैचारिक परियोजना

आंबेडकरवाद को केवल दलित-विमर्श तक सीमित कर देना उसके व्यापक दार्शनिक और सामाजिक आयामों को संकुचित कर देना है। यह सत्य है कि जाति-आधारित उत्पीड़न उसके चिंतन का ऐतिहासिक संदर्भ रहा, किंतु उसका अंतिम लक्ष्य पीड़ित-अस्मिता की स्थायी स्थापना नहीं, बल्कि मनुष्य की गरिमा की सार्वभौमिक पुनर्स्थापना है। आंबेडकरवाद पहचान-राजनीति की सीमाओं से आगे बढ़कर … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य और विद्वत्-मंडल की आवश्यकता

1. प्रस्तावना: साहित्य और वैचारिक अनुशासन आंबेडकरवादी साहित्य केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति या सामाजिक प्रतिक्रिया का क्षेत्र नहीं है। यह एक वैचारिक अनुशासन है, जो इतिहास, तर्क और प्रमाण पर आधारित है। यदि इस क्षेत्र में बौद्धिक संतुलन न रहे, तो साहित्य प्रतिक्रियात्मक तो रह सकता है, पर दिशात्मक नहीं। इसी बिंदु पर एक स्थायी बौद्धिक … आगे पढें