दलित, पददलित और महादलित की अवधारणा बनाम “हम दलित नहीं”

भारतीय समाज में वंचित समुदायों की पहचान को लेकर अनेक शब्द प्रचलित हुए हैं। इनमें “पददलित”, “दलित” और “महादलित” प्रमुख हैं। इन शब्दों को सामान्यतः सामाजिक न्याय, प्रतिरोध और मुक्ति की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। किंतु किसी भी अवधारणा का मूल्यांकन केवल उसके ऐतिहासिक उपयोग से नहीं, बल्कि उसके वैचारिक परिणामों से किया … आगे पढें

आंबेडकरवाद : दिशा एवं दृष्टि 

आंबेडकरवाद के संदर्भ में भ्रमित लोगों के भ्रम-निवारण हेतु ही ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका के इस तृतीय अंक का विषय ‘आंबेडकरवाद : दिशा एवं दृष्टि’ रखा गया है । आंबेडकरवाद को सम्यक रूप में समझने के लिए सर्वप्रथम ‘वाद’ का आशय समझना अनिवार्य है । शब्दकोश के अनुसार ‘वाद’ का अर्थ है, “वह दार्शनिक सिद्धांत, जिसके … आगे पढें

अस्पृश्यता, जातिगत भेदभाव, डॉ० आंबेडकर और बौद्ध धम्म

हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा । अल्लामा इक़बाल के इस शेर का वाच्यार्थ यह है कि अपनी सुंदरता से अनजान नरगिस (एक प्रकार का फूल) हजारों सालों तक अपनी बेनूरी (अंधेपन) पर रोती रहती है कि मुझमें कोई गुण, आकर्षण या सुन्दरता नहीं … आगे पढें

आंबेडकरवादी कहानी की सम्यक परंपरा

लीक-लीक गाड़ी चले, लीकहिं चले कपूत । लीक छाँड़ि तीनों चलें, शायर सिंह सपूत ।। भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का उक्त दोहा परंपरा का अंधानुकरण न करने की सीख देता है । ध्यातव्य है कि न तो हर पुरानी परंपरा गलत होती है और न ही हर नयी परंपरा सही होती है । क्योंकि नयी परंपरा … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन

समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य पुस्तकें | मूल्य सूची और ऑर्डर

📚 आंबेडकरवादी साहित्य — पुस्तकें उपलब्ध ये केवल पुस्तकें नहीं, वैचारिक हस्तक्षेप हैं। स्पष्ट विचार, तर्क और सामाजिक समझ के लिए आवश्यक पाठ। 📖 उपलब्ध पुस्तकें: 1. गुरु रविदास पचासा — ₹25 2. धम्म-चर्चा — ₹30 3. धम्म अधम्म सद्धम्म — ₹100 4. आडंबर-मिशन — ₹100 5. आंबेडकर का मिशन और समकालीन भारत — ₹120 … आगे पढें

धम्म-चर्चा अभियान : विचार से व्यवस्था तक

धम्म-चर्चा कोई सामान्य गतिविधि नहीं है। यह एक संगठित वैचारिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य धम्म को जीवन, समाज और संविधान के साथ जोड़कर समझना और स्थापित करना है। यहाँ धम्म केवल कहा नहीं जाता, बल्कि उसे खोला जाता है, परखा जाता है और व्यवहार में उतारने की दिशा दी जाती है। धम्म-चर्चा अभियान का मूल … आगे पढें

हिंदी के आंबेडकरवादी कवि और आलोचक : एक स्पष्ट वैचारिक सूची

आंबेडकरवादी साहित्य केवल एक साहित्यिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार-दर्शन पर आधारित एक स्पष्ट वैचारिक साहित्यिक धारा है। इसका मूल आधार सामाजिक न्याय, समता, मानव गरिमा और वैज्ञानिक दृष्टि है। इस साहित्य की पहचान किसी जातीय या भावनात्मक आग्रह से नहीं, बल्कि आंबेडकरवादी वैचारिक प्रतिबद्धता से निर्धारित होती है। हिंदी में आंबेडकरवादी … आगे पढें