आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन | संपादकीय
समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें