आंबेडकरवादी साहित्य की दलित साहित्य से भिन्नता – एक आवश्यक स्पष्टीकरण
आंबेडकरवादी साहित्य को प्रायः दलित साहित्य के समान समझ लिया जाता है। यह समानता देखने में सहज लग सकती है, किंतु वैचारिक दृष्टि से यह भ्रमपूर्ण और अपूर्ण समझ है। दोनों साहित्यिक प्रवृत्तियों के बीच कुछ साझा सरोकार अवश्य हैं, पर उनकी दृष्टि, उद्देश्य और पद्धति में मूलभूत अंतर है। यह लेख दोनों साहित्यिक धाराओं … आगे पढें