‘बहुजन’ शब्द का भ्रमजाल
भारतीय सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में कुछ ऐसे शब्द प्रचलित हुए हैं, जिनका आकर्षण उनके वास्तविक अर्थ से अधिक होता है। ऐसे शब्द सुनने में व्यापक, न्यायपूर्ण और जनपक्षीय प्रतीत होते हैं। किंतु जब उनके अर्थ और उनके प्रयोग की गंभीर समीक्षा की जाती है, तो उनके भीतर छिपे हुए अनेक अंतर्विरोध सामने आते हैं। ‘बहुजन’ ऐसा ही एक शब्द है। आज यह शब्द राजनीति, समाज, संस्कृति और साहित्य—सभी क्षेत्रों में बार-बार प्रयुक्त किया जाता … आगे पढें