अहिच्छत्र धम्महाल, बरेली में डॉ. रामविलास भारती का धम्मांजलि समारोह आयोजित

बरेली। आशा बुद्धप्रिय फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. बी.आर. बुद्धप्रिय की अध्यक्षता में 4 अक्टूबर 2026 को अहिच्छत्र धम्महाल, आनंद विहार, संजय नगर, बरेली में डॉ. रामविलास भारती का धम्मांजलि समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उपस्थित लोगों ने डॉ. रामविलास भारती के सामाजिक, शैक्षिक और वैचारिक योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें धम्मांजलि अर्पित की। … आगे पढें

‘बहुजन’ शब्द का भ्रमजाल

भारतीय सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में कुछ ऐसे शब्द प्रचलित हुए हैं, जिनका आकर्षण उनके वास्तविक अर्थ से अधिक होता है। ऐसे शब्द सुनने में व्यापक, न्यायपूर्ण और जनपक्षीय प्रतीत होते हैं। किंतु जब उनके अर्थ और उनके प्रयोग की गंभीर समीक्षा की जाती है, तो उनके भीतर छिपे हुए अनेक अंतर्विरोध सामने आते हैं। ‘बहुजन’ ऐसा ही एक शब्द है। आज यह शब्द राजनीति, समाज, संस्कृति और साहित्य—सभी क्षेत्रों में बार-बार प्रयुक्त किया जाता … आगे पढें

डॉ. आंबेडकर के 135वें जयंती महोत्सव में सामाजिक न्याय, धम्म और आंबेडकरवादी चेतना पर हुआ विमर्श 

आंबेडकर महासभा आयोजन समिति, उत्तर प्रदेश (पजीकृत) एवं डॉ. आंबेडकर बहुजन विकास समिति (पंजीकृत) के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. भीमराव आंबेडकर का 135वाँ जयंती महोत्सव दिनांक 12 अप्रैल 2026 को सेक्टर ई-7, ट्रिनिटी स्कूल के निकट, हरदोई रोड, दुबग्गा, लखनऊ में गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी. सुमन एडवोकेट, हाईकोर्ट, … आगे पढें

महाकवि एल.एन. सुधाकर के काव्य में आंबेडकरवादी चिंतन का स्वरूप

शोध सारांश प्रस्तुत शोध-पत्र में महाकवि एल.एन. सुधाकर के काव्य में अभिव्यक्त आंबेडकरवादी चिंतन के स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। सुधाकर जी के काव्य में बौद्ध धम्म, समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, सामाजिक न्याय, शोषण-विरोध, आरक्षण, राष्ट्रहित तथा मानव-कल्याण की चेतना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। उनके काव्य में डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और … आगे पढें

दलित, पददलित और महादलित की अवधारणा बनाम “हम दलित नहीं”

भारतीय समाज में वंचित समुदायों की पहचान को लेकर अनेक शब्द प्रचलित हुए हैं। इनमें “पददलित”, “दलित” और “महादलित” प्रमुख हैं। इन शब्दों को सामान्यतः सामाजिक न्याय, प्रतिरोध और मुक्ति की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। किंतु किसी भी अवधारणा का मूल्यांकन केवल उसके ऐतिहासिक उपयोग से नहीं, बल्कि उसके वैचारिक परिणामों से किया … आगे पढें

आंबेडकरवादी चेतना का काव्यात्मक रूप : दामोदर मोरे का अध्ययन

शोध सारांश प्रस्तुत शोध-पत्र में दामोदर मोरे की कविताओं में निहित आंबेडकरवादी दृष्टि का विश्लेषण किया गया है। मोरे की काव्य-दृष्टि सामाजिक यथार्थ से सीधे टकराती है और जाति, वर्ण, मनुवाद, धार्मिक पाखंड तथा सांस्कृतिक वर्चस्ववाद के विरुद्ध वैचारिक प्रतिरोध का स्वर प्रस्तुत करती है। उनकी कविताएँ केवल करुणा या पीड़ा का वर्णन नहीं करतीं, … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन

समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें