डॉ. आंबेडकर के 135वें जयंती महोत्सव में सामाजिक न्याय, धम्म और आंबेडकरवादी चेतना पर हुआ विमर्श 

— मनोहर लाल 'प्रेमी'
मंडल संवाददाता: लखनऊ मंडल, 12 अप्रैल 2026

आंबेडकर महासभा आयोजन समिति, उत्तर प्रदेश (पजीकृत) एवं डॉ. आंबेडकर बहुजन विकास समिति (पंजीकृत) के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. भीमराव आंबेडकर का 135वाँ जयंती महोत्सव दिनांक 12 अप्रैल 2026 को सेक्टर ई-7, ट्रिनिटी स्कूल के निकट, हरदोई रोड, दुबग्गा, लखनऊ में गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी. सुमन एडवोकेट, हाईकोर्ट, लखनऊ ने की।

कार्यक्रम का आरम्भ भिक्खु करुणानन्द एवं भिक्खु दीपांकर द्वारा दीप प्रज्वलन तथा त्रिशरण-पंचशील पाठ के साथ किया गया। तत्पश्चात भिक्षु करुणानन्द जी ने उपस्थित धम्म उपासक-उपासिकाओं को धम्म देशना प्रदान करते हुए तथागत बुद्ध के करुणा, प्रज्ञा और समता पर आधारित धम्म संदेश को विस्तार से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में आमंत्रित सम्मानित अतिथियों का मंचासीन कर उनका अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। प्रमुख वक्ताओं में प्रोफेसर टी.पी. राही (लखनऊ विश्वविद्यालय), डॉ. योगेन्द्र सिंह (राजकीय पी.जी. कॉलेज, महमूदाबाद, सीतापुर), हीरालाल विद्यार्थी (बौद्धाचार्य एवं सामाजिक चिंतक), देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ (संपादक, आंबेडकरवादी साहित्य पत्रिका) तथा डॉ. आलोक यादव शामिल रहे।

अपने संबोधन में प्रोफेसर टी.पी. राही ने डॉ. आंबेडकर के सामाजिक न्याय, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित मिशन की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया। डाॅ. योगेन्द्र सिंह ने सामाजिक परिवर्तन और संवैधानिक चेतना के महत्व पर प्रकाश डाला। श्रद्धेय हीरालाल विद्यार्थी ने बुद्ध और आंबेडकर के विचारों के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करते हुए समतामूलक समाज निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ ने आंबेडकरवादी चिंतन, साहित्य और सामाजिक चेतना के प्रश्नों पर अपना विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आंबेडकरवाद मनुष्य को हीनताबोध से मुक्त कर स्वाभिमान, समता और संवैधानिक चेतना की भूमि पर स्थापित करता है। अपने वक्तव्य में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “दलित व्यक्ति सही मायने में आंबेडकरवादी नहीं होता और आंबेडकरवादी व्यक्ति कभी दलित नहीं होता।” उन्होंने इस कथन की व्याख्या करते हुए कहा कि आंबेडकरवाद का उद्देश्य मनुष्य को पीड़ित पहचान में स्थायी रूप से बाँधना नहीं, बल्कि उसे आत्मसम्मान, संगठन, शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करना है।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण साहित्यकार मनोहर लाल ‘प्रेमी’ की प्रकाशित पुस्तक “हम दलित नहीं” का लोकार्पण रहा। सभी सम्मानित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में पुस्तक का विमोचन सम्पन्न हुआ। वक्ताओं ने पुस्तक को पहचान, स्वाभिमान और आंबेडकरवादी चेतना के प्रश्न पर एक महत्वपूर्ण वैचारिक हस्तक्षेप बताया। पुस्तक के प्रतिपाद्य पर उपस्थित जनसमूह के मध्य सार्थक संवाद भी हुआ।

कार्यक्रम में स्थानीय छात्र-छात्राओं द्वारा उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें उपस्थित दर्शकों ने अत्यंत सराहा। भाषण प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों में इच्छिता, कृष्वी, अनुप्रिया, दिव्यांशी एवं विधि प्रमुख रहीं। गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सिद्धार्थ सम्यक बौद्ध, समीक्षा, समृद्धि, आराध्या विद्यार्थी तथा अभिनव ने उल्लेखनीय सहभागिता की। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत गायक कलाकार संजीव कुमार द्वारा प्रस्तुत गीतों को भी श्रोताओं ने विशेष रूप से सराहा।

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। कृति गौतम सुपुत्री महेन्द्र पाल सिंह एवं सावित्री गौतम को प्रथम प्रयास में पी.सी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण करने पर विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसी प्रकार कार्यक्रम हेतु सर्वाधिक आर्थिक सहयोग (₹6000) प्रदान करने के लिए उपासिका बिन्दू जी को भी विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन इंजीनियर गोवर्धन लाल ने किया। उन्होंने पूरे आयोजन को प्रभावी, अनुशासित और सारगर्भित ढंग से संचालित करते हुए सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के विचारों का समन्वय किया।

समारोह में डॉ. आंबेडकर बहुजन विकास समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। समिति के संरक्षक इंजीनियर गोवर्धन लाल, अध्यक्ष इंजीनियर आर.सी. प्रभाकर, उपाध्यक्ष के.एल. गौतम एवं अशोक कुमार, महासचिव मनोहर लाल ‘प्रेमी’, कोषाध्यक्ष मिथिलेश कुमारी, संयुक्त सचिव संजीव कुमार, संगठन सचिव चन्द्रपाल, मीडिया प्रभारी गौतम कुमार तथा विधिक सलाहकार प्रकाश नारायण चौधरी एवं अशर्फी लाल वर्मा, लेखा परीक्षक एन. एल. कोठारी सहित अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह सौहार्दपूर्ण, प्रेरणादायी एवं वैचारिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। उपस्थित जनसमूह ने डॉ. आंबेडकर के विचारों, बुद्ध के धम्म तथा संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने और समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व एवं न्याय पर आधारित समाज निर्माण हेतु निरंतर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।