‘बहुजन’ शब्द का भ्रमजाल

भारतीय सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में कुछ ऐसे शब्द प्रचलित हुए हैं, जिनका आकर्षण उनके वास्तविक अर्थ से अधिक होता है। ऐसे शब्द सुनने में व्यापक, न्यायपूर्ण और जनपक्षीय प्रतीत होते हैं। किंतु जब उनके अर्थ और उनके प्रयोग की गंभीर समीक्षा की जाती है, तो उनके भीतर छिपे हुए अनेक अंतर्विरोध सामने आते हैं। ‘बहुजन’ ऐसा ही एक शब्द है। आज यह शब्द राजनीति, समाज, संस्कृति और साहित्य—सभी क्षेत्रों में बार-बार प्रयुक्त किया जाता … आगे पढें

आदर्शोन्मुख यथार्थ की अभिव्यक्ति ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’

हिंदी कहानी का उद्भव बीसवीं सदी में हुआ। हिंदी कहानीकारों में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, यशपाल, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, ‘अज्ञेय’, जैनेन्द्र, रांगेय राघव आदि ने हिंदी कहानी को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी कहानी ने आंदोलन के रूप में ‘नई कहानी’ से लेकर ‘अकहानी’, ‘सचेतन कहानी’, ‘सहज कहानी’, ‘समानांतर कहानी’, ‘एक कहानी’ और ‘समकालीन … आगे पढें

पुजारी (आंबेडकरवादी कहानी)

सोहन प्रसाद रोज सुबह जागने के बाद सबसे पहले अपनी माँ के पैर छूते थे । उसके बाद ही वे कोई दूसरा काम करते थे । उनकी आदत थी कि वे बिना स्नान किये भोजन तो दूर, नाश्ता भी नहीं करते थे । सोहन जी बुद्धपुर गाँव के निवासी थे, जो गाजीपुर और चंदौली की … आगे पढें

अधिकार (आंबेडकरवादी कहानी)

आंबेडकर पार्क में बेंच पर बैठा एक युवक बार-बार अपनी मोबाइल की स्क्रीन पर समय देख रहा था । बीच-बीच में वह पार्क के मुख्य द्वार की ओर भी देख लेता था । वह मुख्य द्वार के सामने पार्क की चारदिवारी के पास लगी बेंच पर उत्तर की ओर मुँह करके बैठा हुआ था । … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : YouTube चैनल के गीत

‘आंबेडकरवादी साहित्य’ (AMBEDKARVADI SAHITYA) बुद्ध-धम्म और आंबेडकरवादी विचारधारा से संबंधित साहित्य, गीत, कविताओं, नाटकों तथा अन्य रचनात्मक सामग्री का YouTube चैनल है। चैनल का उद्देश्य आंबेडकरवादी साहित्य और विचारधारा से संबंधित रचनाओं को व्यापक पाठक एवं दर्शक समुदाय तक पहुँचाना है। ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ चैनल पर प्रकाशित गीतों में तथागत बुद्ध और उनका धम्म, बाबा साहेब … आगे पढें

एक महाकवि : दो मुलाकातें (आंबेडकरवादी संस्मरण)

मनुष्य अपने जीवनकाल में बहुत से व्यक्तियों से मिलता है, किंतु वह कुछ ही व्यक्तियों के व्यक्तित्व से प्रभावित होता है । एक कवि के रूप में मेरी पहचान दसवीं कक्षा में पढ़ते समय ही बन गयी थी । तब से लेकर अब तक न जाने कितने कवियों से मैं मिल चुका हूँ । किंतु … आगे पढें

आंबेडकरवाद और आंबेडकरवादी चेतना

• शब्दकोश के अनुसार ‘वाद’ का अर्थ है, ” वह दार्शनिक सिद्धांत, जिसके अनुसार संसार की सत्ता उसी रूप में मानी जाती है, जैसी वह सामान्य मनुष्य को दृष्टिगोचर है। ” ‘वाद’ शब्द संस्कृत के ‘वाक्’ शब्द से बना है। ‘वाक्’ का अर्थ है – ‘वाणी’; तथा ‘वाद’ का अर्थ है – कथन, सिद्धांत, विचारधारा। … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे कहा जाए?

आंबेडकरवादी साहित्य के प्रसार के साथ एक प्रश्न बार-बार सामने आता है—आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे माना जाए? और उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका या ‘आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन’ से जुड़ाव आंबेडकरवादी साहित्यकार होने की शर्त है? ये प्रश्न केवल पहचान से जुड़े हुए नहीं हैं; ये सीधे-सीधे बौद्धिक स्वतंत्रता, वैचारिक … आगे पढें