आदर्शोन्मुख यथार्थ की अभिव्यक्ति ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’

— देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

हिंदी कहानी का उद्भव बीसवीं सदी में हुआ। हिंदी कहानीकारों में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, यशपाल, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, ‘अज्ञेय’, जैनेन्द्र, रांगेय राघव आदि ने हिंदी कहानी को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी कहानी ने आंदोलन के रूप में ‘नई कहानी’ से लेकर ‘अकहानी’, ‘सचेतन कहानी’, ‘सहज कहानी’, ‘समानांतर कहानी’, ‘एक कहानी’ और ‘समकालीन हिंदी कहानी’ तक की विकास यात्रा की है।

बीसवीं सदी के अंतिम दशक में आंबेडकरवादी कहानी का अस्तित्व प्रकाश में आया। आंबेडकरवादी कहानीकारों में मोहनदास नैमिशराय, ओमप्रकाश वाल्मीकि और डॉ. जयप्रकाश कर्दम आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। इसी श्रृंखला में एक नाम श्यामलाल राही ‘प्रियदर्शी’ जी का भी है।

राही जी का कहानी-संग्रह ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’ वर्ष 2014 में लता साहित्य सदन, गाज़ियाबाद से प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में कुल सत्रह कहानियाँ हैं। राही जी ने ‘अपनी बात’ शीर्षक के अंतर्गत अपनी कहानियों के बारे में लिखा है—

“इलाहाबाद प्रवास की अवधि में लगभग एक माह में ये कहानियाँ लिखी गई थीं। अधिकांश कहानियाँ ग्रामीण अंचल की हैं। अधिकतर कहानियों का कथानक सत्य है, केवल स्थान व नाम परिवर्तित हैं। आप इन्हें सत्य कथाएँ कह सकते हैं।”

राही जी की कहानियों में आर्थिक शोषण, छुआछूत, जातिभेद, जीवन-संघर्ष, राजनीतिक प्रपंच, पारिवारिक विघटन, अवैध यौन-संबंध, सामाजिक क्रांति आदि सभी का यथार्थ समाविष्ट है। उनके कहानी-संग्रह ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’ में संग्रहीत संपूर्ण कहानियों का समालोचनात्मक परिचय यहाँ प्रस्तुत है।…..(पूरा अध्याय पढ़ने के लिए पीडीएफ डाउनलोड करें।)

निष्कर्ष

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि श्यामलाल राही ‘प्रियदर्शी’ जी का कहानी-संग्रह ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’ पढ़ते समय हिंदी साहित्य का कोई सुधी पाठक उपन्यास सम्राट एवं कहानीकार प्रेमचंद का स्मरण किए बिना नहीं रह सकता। क्योंकि राही जी की कथाशैली प्रेमचंद की कथाशैली के ही समान है। उनकी कहानियों में भी प्रेमचंद की भाँति आदर्शोन्मुख यथार्थ सम्मिलित है। इस संग्रह में संग्रहीत सभी कहानियाँ सामाजिक यथार्थ को समेटे हुए हैं। साथ ही इन कहानियों से पाठक को कोई न कोई सीख अवश्य मिलती है। राही जी की कहानियाँ प्रेरक हैं, जो पाठक को सम्यक और संतुलित जीवन जीने का संदेश देती हैं।…..(शेष निष्कर्ष पीडीएफ में पढ़ें।)

📖 पुस्तक-संदर्भ

आदर्शोन्मुख यथार्थ की अभिव्यक्ति ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’ शीर्षक यह अध्याय देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ की पुस्तक ‘श्यामलाल राही ‘प्रियदर्शी’ : व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ में प्रकाशित है।

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प्रकाशक : लता साहित्य सदन

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