आदर्शोन्मुख यथार्थ की अभिव्यक्ति ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’

— देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ हिंदी कहानी का उद्भव बीसवीं सदी में हुआ। हिंदी कहानीकारों में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, यशपाल, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, ‘अज्ञेय’, जैनेन्द्र, रांगेय राघव आदि ने हिंदी कहानी को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी कहानी ने आंदोलन के रूप में ‘नई कहानी’ से लेकर ‘अकहानी’, ‘सचेतन कहानी’, ‘सहज कहानी’, ‘समानांतर कहानी’, … आगे पढें

पुजारी | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

सोहन प्रसाद रोज सुबह जागने के बाद सबसे पहले अपनी माँ के पैर छूते थे । उसके बाद ही वे कोई दूसरा काम करते थे । उनकी आदत थी कि वे बिना स्नान किये भोजन तो दूर, नाश्ता भी नहीं करते थे । सोहन जी बुद्धपुर गाँव के निवासी थे, जो गाजीपुर और चंदौली की … आगे पढें

अधिकार | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

आंबेडकर पार्क में बेंच पर बैठा एक युवक बार-बार अपनी मोबाइल की स्क्रीन पर समय देख रहा था । बीच-बीच में वह पार्क के मुख्य द्वार की ओर भी देख लेता था । वह मुख्य द्वार के सामने पार्क की चारदिवारी के पास लगी बेंच पर उत्तर की ओर मुँह करके बैठा हुआ था । … आगे पढें