महाकवि एल.एन. सुधाकर के काव्य में आंबेडकरवादी चिंतन का स्वरूप

शोध सारांश प्रस्तुत शोध-पत्र में महाकवि एल.एन. सुधाकर के काव्य में अभिव्यक्त आंबेडकरवादी चिंतन के स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। सुधाकर जी के काव्य में बौद्ध धम्म, समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, सामाजिक न्याय, शोषण-विरोध, आरक्षण, राष्ट्रहित तथा मानव-कल्याण की चेतना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। उनके काव्य में डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और … आगे पढें

संत रविदास के काव्य में बौद्ध चिंतन

संतकवि रविदास जी के जीवन परिचय और उनकी विचारधारा के विषय में विद्वानों में पर्याप्त मतभेद है। हिंदू विद्वान उन्हें एक हिंदू भक्त के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि बौद्ध विद्वान उन्हें बौद्ध विरासत का पुरोधा कहते हैं। संत रविदास जी के पंथ का अनुसरण करने वाले लोग उनके नाम पर ‘रविदासिया धर्म’ की … आगे पढें

आंबेडकरवादी चेतना का काव्यात्मक रूप : दामोदर मोरे का अध्ययन

शोध सारांश प्रस्तुत शोध-पत्र में दामोदर मोरे की कविताओं में निहित आंबेडकरवादी दृष्टि का विश्लेषण किया गया है। मोरे की काव्य-दृष्टि सामाजिक यथार्थ से सीधे टकराती है और जाति, वर्ण, मनुवाद, धार्मिक पाखंड तथा सांस्कृतिक वर्चस्ववाद के विरुद्ध वैचारिक प्रतिरोध का स्वर प्रस्तुत करती है। उनकी कविताएँ केवल करुणा या पीड़ा का वर्णन नहीं करतीं, … आगे पढें