आदर्शोन्मुख यथार्थ की अभिव्यक्ति ‘जनेऊ और मोची ठाकुर’

— देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ हिंदी कहानी का उद्भव बीसवीं सदी में हुआ। हिंदी कहानीकारों में प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, यशपाल, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, ‘अज्ञेय’, जैनेन्द्र, रांगेय राघव आदि ने हिंदी कहानी को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदी कहानी ने आंदोलन के रूप में ‘नई कहानी’ से लेकर ‘अकहानी’, ‘सचेतन कहानी’, ‘सहज कहानी’, ‘समानांतर कहानी’, … आगे पढें

पुजारी | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

सोहन प्रसाद रोज सुबह जागने के बाद सबसे पहले अपनी माँ के पैर छूते थे । उसके बाद ही वे कोई दूसरा काम करते थे । उनकी आदत थी कि वे बिना स्नान किये भोजन तो दूर, नाश्ता भी नहीं करते थे । सोहन जी बुद्धपुर गाँव के निवासी थे, जो गाजीपुर और चंदौली की … आगे पढें

अधिकार | देवचंद्र भारती ‘प्रखर’

आंबेडकर पार्क में बेंच पर बैठा एक युवक बार-बार अपनी मोबाइल की स्क्रीन पर समय देख रहा था । बीच-बीच में वह पार्क के मुख्य द्वार की ओर भी देख लेता था । वह मुख्य द्वार के सामने पार्क की चारदिवारी के पास लगी बेंच पर उत्तर की ओर मुँह करके बैठा हुआ था । … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : YouTube चैनल के गीत

‘आंबेडकरवादी साहित्य’ (AMBEDKARVADI SAHITYA) बुद्ध-धम्म और आंबेडकरवादी विचारधारा से संबंधित साहित्य, गीत, कविताओं, नाटकों तथा अन्य रचनात्मक सामग्री का YouTube चैनल है। चैनल का उद्देश्य आंबेडकरवादी साहित्य और विचारधारा से संबंधित रचनाओं को व्यापक पाठक एवं दर्शक समुदाय तक पहुँचाना है। ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ चैनल पर प्रकाशित गीतों में तथागत बुद्ध और उनका धम्म, बाबा साहेब … आगे पढें

एक महाकवि : दो मुलाकातें | संस्मरण

मनुष्य अपने जीवनकाल में बहुत से व्यक्तियों से मिलता है, किंतु वह कुछ ही व्यक्तियों के व्यक्तित्व से प्रभावित होता है । एक कवि के रूप में मेरी पहचान दसवीं कक्षा में पढ़ते समय ही बन गयी थी । तब से लेकर अब तक न जाने कितने कवियों से मैं मिल चुका हूँ । किंतु … आगे पढें

आंबेडकरवादी कहानी की सम्यक परंपरा

लीक-लीक गाड़ी चले, लीकहिं चले कपूत । लीक छाँड़ि तीनों चलें, शायर सिंह सपूत ।। भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का उक्त दोहा परंपरा का अंधानुकरण न करने की सीख देता है । ध्यातव्य है कि न तो हर पुरानी परंपरा गलत होती है और न ही हर नयी परंपरा सही होती है । क्योंकि नयी परंपरा … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन

समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें

आडंबर-मिशन पुस्तक | आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन

आडंबर-मिशन (समसामयिक समाज पर आंबेडकरवादी आलोचनात्मक विश्लेषण) देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ का निबंध-संग्रह है। पुस्तक का केंद्र आंबेडकर-मिशन की वह स्थिति है, जहाँ विचार और आचरण के बीच का अंतर लगातार बढ़ता दिखाई देता है। आंबेडकर के नाम का सार्वजनिक जीवन में जितना विस्तार हुआ है, क्या उसी अनुपात में उनके विचारों की समझ और प्रतिबद्धता … आगे पढें