आंबेडकरवादी कहानी की सम्यक परंपरा

लीक-लीक गाड़ी चले, लीकहिं चले कपूत। लीक छाँड़ि तीनों चलें, शायर सिंह सपूत।। भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का उक्त दोहा परंपरा का अंधानुकरण न करने की सीख देता है। ध्यातव्य है कि न तो हर पुरानी परंपरा गलत होती है और न ही हर नयी परंपरा सही होती है। क्योंकि नयी परंपरा ही पुरानी परंपरा का … आगे पढें

आंबेडकरवादी चेतना का काव्यात्मक रूप : दामोदर मोरे का अध्ययन

शोध सारांश प्रस्तुत शोध-पत्र में दामोदर मोरे की कविताओं में निहित आंबेडकरवादी दृष्टि का विश्लेषण किया गया है। मोरे की काव्य-दृष्टि सामाजिक यथार्थ से सीधे टकराती है और जाति, वर्ण, मनुवाद, धार्मिक पाखंड तथा सांस्कृतिक वर्चस्ववाद के विरुद्ध वैचारिक प्रतिरोध का स्वर प्रस्तुत करती है। उनकी कविताएँ केवल करुणा या पीड़ा का वर्णन नहीं करतीं, … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : अवधारणा, सीमा और प्रतिमान

1. प्रस्तावना समकालीन हिंदी साहित्य में “आंबेडकरवादी साहित्य” एक प्रचलित पद बन चुका है, किंतु प्रचलन और सिद्धांत समान नहीं होते। किसी भी साहित्यिक धारा की स्थिरता उसके नाम में नहीं, उसकी वैचारिक स्पष्टता में होती है। यदि अवधारणा अस्पष्ट रहे, तो विमर्श भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और आंशिक व्याख्याओं में बिखर जाता है। आंबेडकरवादी साहित्य को … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन

समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन : पुस्तक-सूची

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकें केवल पढ़ने की सामग्री नहीं, बल्कि विचार और वैचारिक समझ को विकसित करने वाली पुस्तकें हैं। इनमें बुद्ध-धम्म, आंबेडकर-दर्शन, सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा से जुड़े प्रश्नों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इन पुस्तकों का उद्देश्य पाठक को स्थापित मान्यताओं पर विचार करने और सामाजिक यथार्थ को … आगे पढें

धम्म-चर्चा अभियान : विचार से व्यवस्था तक

धम्म-चर्चा कोई सामान्य गतिविधि नहीं है। यह एक संगठित वैचारिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य धम्म को जीवन, समाज और संविधान के साथ जोड़कर समझना और स्थापित करना है। यहाँ धम्म केवल कहा नहीं जाता, बल्कि उसे खोला जाता है, परखा जाता है और व्यवहार में उतारने की दिशा दी जाती है। धम्म-चर्चा अभियान का मूल … आगे पढें

हिंदी के आंबेडकरवादी कवि और आलोचक

आंबेडकरवादी साहित्य केवल एक साहित्यिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार-दर्शन पर आधारित एक स्पष्ट वैचारिक साहित्यिक धारा है। इसका मूल आधार सामाजिक न्याय, समता, मानव गरिमा और वैज्ञानिक दृष्टि है। इस साहित्य की पहचान किसी जातीय या भावनात्मक आग्रह से नहीं, बल्कि आंबेडकरवादी वैचारिक प्रतिबद्धता से निर्धारित होती है। हिंदी में आंबेडकरवादी … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन : स्वरूप, उद्देश्य और कार्य-दृष्टि

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन किसी जनसंगठन, अभियान या सदस्यता-आधारित संस्था के रूप में स्थापित नहीं है। इसका स्वरूप मूलतः एक वैचारिक-संपादकीय और प्रकाशन-केंद्र का है। इसका उद्देश्य भीड़-संचालन नहीं, बल्कि विचार-संरचना है; भावनात्मक उत्तेजना नहीं, बल्कि बौद्धिक स्पष्टता है। आज जब साहित्य के नाम पर वैचारिक अस्पष्टता, मिथ्या आरोपण और ऐतिहासिक भ्रम फैलाए जाते हैं, तब … आगे पढें