आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे कहा जाए?

आंबेडकरवादी साहित्य के प्रसार के साथ एक प्रश्न बार-बार सामने आता है—आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे माना जाए? और उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका या ‘आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन’ से जुड़ाव आंबेडकरवादी साहित्यकार होने की शर्त है? ये प्रश्न केवल पहचान से जुड़े हुए नहीं हैं; ये सीधे-सीधे बौद्धिक स्वतंत्रता, वैचारिक … आगे पढें

हर घर आंबेडकरवादी साहित्य – अभियान

हर घर आंबेडकरवादी साहित्य कोई साधारण नारा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना, वैचारिक क्रांति और समतामूलक समाज-निर्माण का सशक्त आंदोलन है। जिस समाज में विचारों की पहुँच घर-घर तक होती है, वही समाज वास्तविक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर होता है। आंबेडकरवादी साहित्य इसी परिवर्तन का आधार है। यह केवल पढ़ने की सामग्री नहीं, … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य को नकारने की चालें और उसका वैचारिक जवाब

दलित साहित्य के कुछ समर्थक पूछते हैं कि दलित साहित्य पर अनेक शोधकार्य हुये हैं, आंबेडकरवादी साहित्य पर कितने शोधकार्य हुये हैं? यानी वे आंबेडकरवादी साहित्य की अवधारणा को नकारते हैं। इसके प्रत्युत्तर में यह लेख प्रस्तुत है। शोध की संख्या से विचारधारा का अस्तित्व तय नहीं होता किसी साहित्यिक अवधारणा की वैधता शोध-प्रबंधों की … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य का मूल उद्देश्य

आंबेडकरवादी साहित्य किसी सामाजिक वर्ग, जाति या संख्यात्मक समूह की अभिव्यक्ति तक सीमित साहित्य नहीं है। यह एक मानवतावादी, विवेकशील और सामाजिक न्याय-आधारित वैचारिकी है, जिसका मूल उद्देश्य शोषण, असमानता और अन्याय से मुक्त एक समतामूलक समाज की रचना करना है। यह साहित्य मनुष्य को उसकी मानवीय गरिमा के साथ देखने की दृष्टि विकसित करता … आगे पढें