आंबेडकरवादी कहानी की सम्यक परंपरा
लीक-लीक गाड़ी चले, लीकहिं चले कपूत। लीक छाँड़ि तीनों चलें, शायर सिंह सपूत।। भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का उक्त दोहा परंपरा का अंधानुकरण न करने की सीख देता है। ध्यातव्य है कि न तो हर पुरानी परंपरा गलत होती है और न ही हर नयी परंपरा सही होती है। क्योंकि नयी परंपरा ही पुरानी परंपरा का … आगे पढें