हिंदी के आंबेडकरवादी कवि और आलोचक

आंबेडकरवादी साहित्य केवल एक साहित्यिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार-दर्शन पर आधारित एक स्पष्ट वैचारिक साहित्यिक धारा है। इसका मूल आधार सामाजिक न्याय, समता, मानव गरिमा और वैज्ञानिक दृष्टि है। इस साहित्य की पहचान किसी जातीय या भावनात्मक आग्रह से नहीं, बल्कि आंबेडकरवादी वैचारिक प्रतिबद्धता से निर्धारित होती है। हिंदी में आंबेडकरवादी … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन : स्वरूप, उद्देश्य और कार्य-दृष्टि

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन किसी जनसंगठन, अभियान या सदस्यता-आधारित संस्था के रूप में स्थापित नहीं है। इसका स्वरूप मूलतः एक वैचारिक-संपादकीय और प्रकाशन-केंद्र का है। इसका उद्देश्य भीड़-संचालन नहीं, बल्कि विचार-संरचना है; भावनात्मक उत्तेजना नहीं, बल्कि बौद्धिक स्पष्टता है। आज जब साहित्य के नाम पर वैचारिक अस्पष्टता, मिथ्या आरोपण और ऐतिहासिक भ्रम फैलाए जाते हैं, तब … आगे पढें

आंबेडकरवाद और आंबेडकरवादी चेतना

• शब्दकोश के अनुसार ‘वाद’ का अर्थ है, ” वह दार्शनिक सिद्धांत, जिसके अनुसार संसार की सत्ता उसी रूप में मानी जाती है, जैसी वह सामान्य मनुष्य को दृष्टिगोचर है। ” ‘वाद’ शब्द संस्कृत के ‘वाक्’ शब्द से बना है। ‘वाक्’ का अर्थ है – ‘वाणी’; तथा ‘वाद’ का अर्थ है – कथन, सिद्धांत, विचारधारा। … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे कहा जाए?

आंबेडकरवादी साहित्य के प्रसार के साथ एक प्रश्न बार-बार सामने आता है—आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे माना जाए? और उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका या ‘आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन’ से जुड़ाव आंबेडकरवादी साहित्यकार होने की शर्त है? ये प्रश्न केवल पहचान से जुड़े हुए नहीं हैं; ये सीधे-सीधे बौद्धिक स्वतंत्रता, वैचारिक … आगे पढें

हर घर आंबेडकरवादी साहित्य – अभियान

हर घर आंबेडकरवादी साहित्य कोई साधारण नारा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना, वैचारिक क्रांति और समतामूलक समाज-निर्माण का सशक्त आंदोलन है। जिस समाज में विचारों की पहुँच घर-घर तक होती है, वही समाज वास्तविक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर होता है। आंबेडकरवादी साहित्य इसी परिवर्तन का आधार है। यह केवल पढ़ने की सामग्री नहीं, … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य को नकारने की चालें और उसका वैचारिक जवाब

दलित साहित्य के कुछ समर्थक पूछते हैं कि दलित साहित्य पर अनेक शोधकार्य हुये हैं, आंबेडकरवादी साहित्य पर कितने शोधकार्य हुये हैं? यानी वे आंबेडकरवादी साहित्य की अवधारणा को नकारते हैं। इसके प्रत्युत्तर में यह लेख प्रस्तुत है। शोध की संख्या से विचारधारा का अस्तित्व तय नहीं होता किसी साहित्यिक अवधारणा की वैधता शोध-प्रबंधों की … आगे पढें

आई.एस.एस.एन.: संरचना, मानक और संपादकीय उत्तरदायित्व

किसी भी वैचारिक अथवा शोधपरक पत्रिका की पहचान केवल उसके वैचारिक रुझान या प्रकाशित सामग्री तक सीमित नहीं होती। आधुनिक अकादमिक व्यवस्था में पत्रिका की संस्थागत विश्वसनीयता, अभिलेखीय उपस्थिति और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए कुछ तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य है। इन्हीं मानकों में आई.एस.एस.एन. (International Standard Serial Number) का विशेष स्थान है। यह केवल … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य का मूल उद्देश्य

आंबेडकरवादी साहित्य किसी सामाजिक वर्ग, जाति या संख्यात्मक समूह की अभिव्यक्ति तक सीमित साहित्य नहीं है। यह एक मानवतावादी, विवेकशील और सामाजिक न्याय-आधारित वैचारिकी है, जिसका मूल उद्देश्य शोषण, असमानता और अन्याय से मुक्त एक समतामूलक समाज की रचना करना है। यह साहित्य मनुष्य को उसकी मानवीय गरिमा के साथ देखने की दृष्टि विकसित करता … आगे पढें