धम्म-चर्चा अभियान : विचार से व्यवस्था तक

धम्म-चर्चा कोई सामान्य गतिविधि नहीं है। यह एक संगठित वैचारिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य धम्म को जीवन, समाज और संविधान के साथ जोड़कर समझना और स्थापित करना है। यहाँ धम्म केवल कहा नहीं जाता, बल्कि उसे खोला जाता है, परखा जाता है और व्यवहार में उतारने की दिशा दी जाती है। धम्म-चर्चा अभियान का मूल … आगे पढें

हिंदी के आंबेडकरवादी कवि और आलोचक : एक स्पष्ट वैचारिक सूची

आंबेडकरवादी साहित्य केवल एक साहित्यिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचार-दर्शन पर आधारित एक स्पष्ट वैचारिक साहित्यिक धारा है। इसका मूल आधार सामाजिक न्याय, समता, मानव गरिमा और वैज्ञानिक दृष्टि है। इस साहित्य की पहचान किसी जातीय या भावनात्मक आग्रह से नहीं, बल्कि आंबेडकरवादी वैचारिक प्रतिबद्धता से निर्धारित होती है। हिंदी में आंबेडकरवादी … आगे पढें

आंबेडकरवाद : दलित-विमर्श से व्यापक वैचारिक परियोजना

आंबेडकरवाद को केवल दलित-विमर्श तक सीमित कर देना उसके व्यापक दार्शनिक और सामाजिक आयामों को संकुचित कर देना है। यह सत्य है कि जाति-आधारित उत्पीड़न उसके चिंतन का ऐतिहासिक संदर्भ रहा, किंतु उसका अंतिम लक्ष्य पीड़ित-अस्मिता की स्थायी स्थापना नहीं, बल्कि मनुष्य की गरिमा की सार्वभौमिक पुनर्स्थापना है। आंबेडकरवाद पहचान-राजनीति की सीमाओं से आगे बढ़कर … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन : स्वरूप, उद्देश्य और कार्य-दृष्टि

आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन किसी जनसंगठन, अभियान या सदस्यता-आधारित संस्था के रूप में स्थापित नहीं है। इसका स्वरूप मूलतः एक वैचारिक-संपादकीय और प्रकाशन-केंद्र का है। इसका उद्देश्य भीड़-संचालन नहीं, बल्कि विचार-संरचना है; भावनात्मक उत्तेजना नहीं, बल्कि बौद्धिक स्पष्टता है। आज जब साहित्य के नाम पर वैचारिक अस्पष्टता, मिथ्या आरोपण और ऐतिहासिक भ्रम फैलाए जाते हैं, तब … आगे पढें

आंबेडकरवाद और आंबेडकरवादी चेतना

आंबेडकरवाद क्या है? आंबेडकरवाद का अन्य वादों (मानवतावाद, बहुजनवाद, मार्क्सवाद, नारीवाद, बुद्धवाद, सुधारवाद, आदर्शवाद, प्रकृतिवाद, यथार्थवाद, प्रयोजनवाद) से क्या संबंध है? आंबेडकरवादी चेतना क्या है? आंबेडकरवादी चेतना के बिंदु कौन-कौन से हैं? इन प्रश्नों के उत्तर इस लेख में मौजूद हैं। भूमिका डॉ० भीमराव आंबेडकर जी के विचारों से प्रभावित लोग उनकी धारा में शामिल … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे कहा जाए?

आंबेडकरवादी साहित्य के प्रसार के साथ एक प्रश्न बार-बार सामने आता है—आंबेडकरवादी साहित्यकार किसे माना जाए? और उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका या ‘आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन’ से जुड़ाव आंबेडकरवादी साहित्यकार होने की शर्त है? ये प्रश्न केवल पहचान से जुड़े हुए नहीं हैं; ये सीधे-सीधे बौद्धिक स्वतंत्रता, वैचारिक … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य क्या है? | आंबेडकरवादी साहित्य की वैचारिक परिभाषा, उद्देश्य और ऐतिहासिक भूमिका

आंबेडकरवादी साहित्य कोई भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सामाजिक परिवर्तन का साहित्यिक आंदोलन है। यह साहित्य शोषण, जातिवाद, असमानता और ब्राह्मणवादी वर्चस्व के विरुद्ध संविधान, तर्क, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित रचनात्मक प्रतिरोध है। आंबेडकरवादी साहित्य की वैचारिक नींव डॉ. भीमराव आंबेडकर के दर्शन से निर्मित होती है — जिसमें समता, स्वतंत्रता, … आगे पढें

हर घर आंबेडकरवादी साहित्य – सामाजिक परिवर्तन का वैचारिक अभियान

हर घर आंबेडकरवादी साहित्य कोई साधारण नारा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना, वैचारिक क्रांति और समतामूलक समाज-निर्माण का सशक्त आंदोलन है। जिस समाज में विचारों की पहुँच घर-घर तक होती है, वही समाज वास्तविक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर होता है। आंबेडकरवादी साहित्य इसी परिवर्तन का आधार है। यह केवल पढ़ने की सामग्री नहीं, … आगे पढें