गुरु रविदास पचासा

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गुरु रविदास पचासा संत रविदास जी की वंदना और उनकी कीर्ति के माध्यम से उनकी विचारधारा को प्रस्तुत करने वाली कृति है। यह पुस्तक समतावादी चेतना और सामाजिक न्याय की आंबेडकरवादी वैचारिक परंपरा के संदर्भ में संत रविदास के विचारों को समकालीन पाठकों तक पहुँचाती है।

विवरण

गुरु रविदास पचासा संत रविदास जी की विचारधारा, उनकी सामाजिक दृष्टि और समतावादी चेतना को केंद्र में रखकर प्रस्तुत की गई कृति है। इसमें गुरु रविदास के प्रति वंदना के साथ उनकी कीर्ति को अभिव्यक्त करने वाली रचनाएँ शामिल हैं।

संत रविदास भारतीय सामाजिक चिंतन की उस परंपरा के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं, जिसने मनुष्य की समानता, सामाजिक न्याय और भेदभाव से मुक्ति के प्रश्नों को अपने चिंतन का आधार बनाया। उनकी वाणी में सामाजिक विषमता के विरुद्ध स्पष्ट स्वर और समतामूलक समाज की आकांक्षा दिखाई देती है।

यह कृति गुरु रविदास की विचारधारा को केवल ऐतिहासिक संदर्भ में देखने के बजाय उसे समकालीन सामाजिक संदर्भ और आंबेडकरवादी वैचारिक परंपरा के साथ जोड़कर प्रस्तुत करती है। इसी कारण यह पुस्तक आंबेडकरवादी साहित्य के पाठकों के लिए विशेष महत्त्व रखती है।

पुस्तक में गुरु रविदास की वंदना के साथ कीर्ति-दशक भी शामिल है, जिससे यह कृति श्रद्धाभिव्यक्ति के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और विचारों को साहित्यिक रूप में सामने लाती है।

पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ

> संत रविदास जी की वंदना
> गुरु रविदास की कीर्ति का साहित्यिक प्रस्तुतीकरण
> समतावादी चेतना और सामाजिक न्याय की दृष्टि
> संत रविदास की विचारधारा का समकालीन संदर्भ
> आंबेडकरवादी वैचारिक परंपरा से संबंध
सरल और पठनीय साहित्यिक प्रस्तुति

यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है?

यह पुस्तक संत रविदास, आंबेडकरवाद, समतावादी चिंतन, सामाजिक न्याय और वैचारिक साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है। विशेष रूप से उन पाठकों के लिए जो संत रविदास की विचारधारा को समकालीन सामाजिक संदर्भ में समझना चाहते हैं।

पुस्तक विवरण

पुस्तक : गुरु रविदास पचासा
उपशीर्षक : गुरु रविदास जी की वंदना और कीर्ति-दशक सहित
लेखक : देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
भाषा : हिंदी
प्रकार : वैचारिक/साहित्यिक कृति
प्रकाशक : आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन
ISBN : 978-81-986913-1-6
मूल्य : ₹25

ऑर्डर संबंधी सूचना : न्यूनतम ₹300 की पुस्तकों का ऑर्डर आवश्यक है। डाक खर्च अलग से देय होगा।