विषमता के विरुद्ध

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विषमता के विरुद्ध देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ का कविता-संग्रह है। संग्रह की कविताएँ सामाजिक विषमता, अन्याय और भेदभाव को प्रश्नांकित करते हुए समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय की पक्षधरता प्रस्तुत करती हैं। कविता को सामाजिक यथार्थ और वैचारिक प्रतिरोध के माध्यम के रूप में देखने वाले पाठकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संग्रह है।

विवरण

‘विषमता के विरुद्ध’ देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ का कविता-संग्रह है। यह संग्रह सामाजिक विषमता, अन्याय, भेदभाव और असमान मानवीय संबंधों के विरुद्ध एक स्पष्ट वैचारिक स्वर प्रस्तुत करता है। इन कविताओं में मनुष्य की गरिमा, समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय जैसे मूल्यों की पक्षधरता दिखाई देती है। कवि अपने समय और समाज की उन स्थितियों को प्रश्नांकित करता है, जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करती हैं तथा सामाजिक असमानता को बनाए रखती हैं।

संग्रह की कविताएँ केवल विषमता की पहचान तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उसके विरुद्ध वैचारिक प्रतिरोध और बेहतर मानवीय समाज की आकांक्षा को भी अभिव्यक्त करती हैं। इनमें संवेदना के साथ सामाजिक यथार्थ की सजग दृष्टि और परिवर्तन की चेतना दिखाई देती है।

‘विषमता के विरुद्ध’ उन पाठकों के लिए महत्वपूर्ण कविता-संग्रह है जो कविता को केवल भावाभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अपने समय और समाज से सार्थक संवाद का माध्यम मानते हैं।

पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ

> सामाजिक विषमता और अन्याय के विरुद्ध काव्यात्मक स्वर
> समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय की पक्षधरता
> सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना का समन्वय
> वैचारिक चेतना और प्रतिरोध की अभिव्यक्ति
> समकालीन सामाजिक प्रश्नों से संवाद करती कविताएँ
> साहित्य, समाज और परिवर्तन के संबंध को रेखांकित करता कविता-संग्रह

पुस्तक विवरण

पुस्तक का नाम : विषमता के विरुद्ध
विधा : कविता-संग्रह
लेखक : देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
भाषा : हिंदी
प्रकाशक : आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन
मूल्य : ₹120

ऑर्डर संबंधी सूचना : न्यूनतम ₹300 की पुस्तकों का ऑर्डर आवश्यक है। डाक खर्च अलग से देय होगा।