धम्म-चर्चा

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धम्म-चर्चा धम्म की सामाजिक, नैतिक और व्यावहारिक भूमिका को तर्क एवं विवेक की दृष्टि से समझने वाली वैचारिक पुस्तक है। यह धम्म से जुड़ी प्रचलित भ्रांतियों और सीमित धारणाओं पर विचार करते हुए उसे सामाजिक जीवन और मानवीय व्यवहार के संदर्भ में समझने का आधार प्रस्तुत करती है।

विवरण

धम्म को केवल आस्था, धार्मिक पहचान या व्यक्तिगत साधना तक सीमित करके देखने से उसकी व्यापक सामाजिक भूमिका को समझना कठिन हो जाता है। धम्म-चर्चा धम्म की अवधारणा को इसी सीमित दृष्टि से बाहर निकालकर उसके सामाजिक, नैतिक और व्यावहारिक पक्षों पर विचार करती है।

यह पुस्तक धम्म से संबंधित उन धारणाओं और भ्रमों की पड़ताल करती है, जिनके कारण धम्म को उसके वास्तविक अर्थ और सामाजिक संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जाता है। लेखक धम्म को तर्क, विवेक और मानवीय व्यवहार के संदर्भ में समझने की दिशा प्रस्तुत करते हैं।

धम्म-चर्चा में धम्म को कर्मकांड, रूढ़ि या अंधविश्वास के बजाय जीवन और समाज को देखने वाली एक वैचारिक दृष्टि के रूप में समझने का आग्रह है। पुस्तक इस प्रश्न को भी महत्वपूर्ण बनाती है कि धम्म का मनुष्य के आचरण, सामाजिक संबंधों और सामूहिक जीवन से क्या संबंध है।

पुस्तक का उद्देश्य केवल धम्म के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि पाठक को उसके अर्थ और उपयोगिता पर स्वतंत्र तथा तार्किक ढंग से विचार करने के लिए प्रेरित करना है।

पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ

> धम्म की स्पष्ट एवं तर्कपूर्ण समझ
> धम्म के सामाजिक और नैतिक पक्ष पर विचार
> प्रचलित भ्रांतियों और सीमित धारणाओं का विश्लेषण
> धम्म और मानवीय व्यवहार के संबंध की पड़ताल
> आंबेडकरवादी दृष्टि से धम्म को समझने का आधार

पुस्तक किसके लिए उपयोगी है?

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है, जो बुद्ध-धम्म, आंबेडकरवाद, सामाजिक नैतिकता और वैचारिक साहित्य में रुचि रखते हैं तथा धम्म को तर्क और सामाजिक संदर्भ के साथ समझना चाहते हैं।

पुस्तक : धम्म-चर्चा
भाषा : हिंदी
स्वरूप : वैचारिक एवं विश्लेषणात्मक
लेखक : देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
प्रकाशन : आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन
मूल्य : ₹30

ऑर्डर संबंधी सूचना : न्यूनतम ₹300 की पुस्तकों का ऑर्डर आवश्यक है। डाक खर्च अलग से देय होगा।