आडंबर-मिशन
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आडंबर-मिशन आंबेडकर-मिशन के नाम पर विकसित हो रहे दिखावे, आडंबर, पाखंड और अवसरवादी प्रवृत्तियों पर केंद्रित व्यंग्यात्मक एवं आलोचनात्मक निबंध-संग्रह है। पुस्तक समसामयिक सामाजिक परिस्थितियों को आंबेडकरवादी दृष्टि से परखते हुए यह सवाल उठाती है कि क्या आंबेडकर का नाम लेना ही आंबेडकर-मिशन के प्रति प्रतिबद्धता है, या उसके विचारों और मूल्यों को जीवन तथा समाज में उतारना भी आवश्यक है।
विवरण
आडंबर-मिशन : समसामयिक समाज पर आंबेडकरवादी आलोचनात्मक विश्लेषण देवचंद्र भारती ‘प्रखर’ का ऐसा निबंध-संग्रह है, जिसमें आंबेडकर-मिशन के नाम पर समाज में दिखाई देने वाले आडंबर, दिखावे, पाखंड, व्यक्तिपूजा, अवसरवाद और मिशन-विरोधी आचरण पर व्यंग्यात्मक तथा आलोचनात्मक दृष्टि से विचार किया गया है।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम आज सार्वजनिक जीवन, सामाजिक आंदोलनों, संगठनों, आयोजनों और विभिन्न प्रकार की वैचारिक गतिविधियों में व्यापक रूप से लिया जाता है। किंतु प्रश्न यह है कि आंबेडकर का नाम लेने और आंबेडकर के विचारों को आत्मसात करने के बीच कितनी दूरी है? क्या जयघोष, आयोजन, प्रतीक, तस्वीरें और भाषण ही आंबेडकर-मिशन की पहचान हैं, या सामाजिक समानता, विवेक, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को व्यवहार में उतारना भी उतना ही आवश्यक है? आडंबर-मिशन इसी अंतर को अपना आलोचनात्मक केंद्र बनाता है।
पुस्तक में आंबेडकर-मिशन के नाम पर होने वाली उन प्रवृत्तियों पर व्यंग्य किया गया है, जिनमें मिशन का वास्तविक वैचारिक पक्ष पीछे छूट जाता है और दिखावा, प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा, पद-लोलुपता, प्रतीकात्मकता तथा सामाजिक स्वीकृति की आकांक्षा आगे आ जाती है। लेखक इन प्रवृत्तियों को केवल शिकायत के रूप में नहीं देखते, बल्कि उनके अंतर्विरोधों को व्यंग्य और आलोचना के माध्यम से सामने रखते हैं। इस पुस्तक का निशाना आंबेडकरवाद नहीं, बल्कि आंबेडकरवाद के नाम पर खड़ा किया गया आडंबर है।
लेखक का आग्रह यह है कि किसी व्यक्ति, संगठन या गतिविधि की आंबेडकरवादी प्रासंगिकता केवल उसके नाम, प्रतीकों अथवा घोषणाओं से निर्धारित नहीं हो सकती। उसके विचार, व्यवहार और सामाजिक सरोकार ही उसकी वास्तविक परीक्षा हैं। आंबेडकर के नाम का उपयोग करते हुए यदि व्यक्ति या संगठन उन्हीं सामाजिक प्रवृत्तियों को आगे बढ़ाने लगे, जिनके विरुद्ध आंबेडकर का पूरा वैचारिक संघर्ष था, तो उस स्थिति पर प्रश्न उठाना आवश्यक है। आडंबर-मिशन इसी प्रश्नाकुलता को व्यंग्य की धार देता है।
यह पुस्तक पाठक को केवल दूसरों के आडंबर की पहचान करने के लिए नहीं, बल्कि आंबेडकर-मिशन के नाम पर अपने आचरण और सामाजिक भूमिका की भी समीक्षा करने के लिए प्रेरित करती है। इसलिए इसके व्यंग्य का क्षेत्र बाहर तक सीमित नहीं है; वह उस पूरे सामाजिक वातावरण को कठघरे में खड़ा करता है, जहाँ विचार की अपेक्षा प्रदर्शन और प्रतिबद्धता की अपेक्षा पहचान अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
पुस्तक : आडंबर-मिशन
लेखक : देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
विधा : निबंध-संग्रह
प्रकाशक : आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन
मूल्य : ₹100
ऑर्डर संबंधी सूचना : न्यूनतम ₹300 की पुस्तकों का ऑर्डर आवश्यक है। डाक खर्च अलग से देय होगा।





