दलित, पददलित और महादलित की अवधारणा बनाम “हम दलित नहीं”

भारतीय समाज में वंचित समुदायों की पहचान को लेकर अनेक शब्द प्रचलित हुए हैं। इनमें “पददलित”, “दलित” और “महादलित” प्रमुख हैं। इन शब्दों को सामान्यतः सामाजिक न्याय, प्रतिरोध और मुक्ति की राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। किंतु किसी भी अवधारणा का मूल्यांकन केवल उसके ऐतिहासिक उपयोग से नहीं, बल्कि उसके वैचारिक परिणामों से किया … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य : प्रतिरोध नहीं, पुनर्रचना का अनुशासन

समय का सबसे बड़ा संकट यह है कि विचार की जगह प्रतीक ने ले ली है। डॉ. आंबेडकर का नाम सर्वत्र उच्चारित हो रहा है, परंतु उनका दर्शन उसी अनुपात में अनुपस्थित है। चित्रों और नारों की बहुलता ने अध्ययन और चिंतन की गंभीरता को प्रतिस्थापित कर दिया है। भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस सामाजिक … आगे पढें