आंबेडकरवाद : दिशा एवं दृष्टि 

आंबेडकरवाद के संदर्भ में भ्रमित लोगों के भ्रम-निवारण हेतु ही ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका के इस तृतीय अंक का विषय ‘आंबेडकरवाद : दिशा एवं दृष्टि’ रखा गया है । आंबेडकरवाद को सम्यक रूप में समझने के लिए सर्वप्रथम ‘वाद’ का आशय समझना अनिवार्य है । शब्दकोश के अनुसार ‘वाद’ का अर्थ है, “वह दार्शनिक सिद्धांत, जिसके … आगे पढें