आंबेडकरवादी साहित्य का इतिहास : वैचारिक विकास और काल-विभाजन

आंबेडकरवादी साहित्य का इतिहास केवल रचनात्मक गतिविधियों का क्रम नहीं, बल्कि सामाजिक मुक्ति की चेतना का वैचारिक दस्तावेज है। यह साहित्य डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी, समतामूलक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संचालित होकर शोषण, जाति-व्यवस्था और असमानता के विरुद्ध प्रतिरोध का सशक्त माध्यम बना। इसके वैचारिक विकास और काल-विभाजन का अध्ययन यह स्पष्ट करता है … आगे पढें

आई.एस.एस.एन.: संरचना, मानक और संपादकीय उत्तरदायित्व

किसी भी वैचारिक अथवा शोधपरक पत्रिका की पहचान केवल उसके वैचारिक रुझान या प्रकाशित सामग्री तक सीमित नहीं होती। आधुनिक अकादमिक व्यवस्था में पत्रिका की संस्थागत विश्वसनीयता, अभिलेखीय उपस्थिति और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए कुछ तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य है। इन्हीं मानकों में आई.एस.एस.एन. (International Standard Serial Number) का विशेष स्थान है। यह केवल … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य की दलित साहित्य से भिन्नता – एक आवश्यक स्पष्टीकरण

आंबेडकरवादी साहित्य को प्रायः दलित साहित्य के समान समझ लिया जाता है। यह समानता देखने में सहज लग सकती है, किंतु वैचारिक दृष्टि से यह भ्रमपूर्ण और अपूर्ण समझ है। दोनों साहित्यिक प्रवृत्तियों के बीच कुछ साझा सरोकार अवश्य हैं, पर उनकी दृष्टि, उद्देश्य और पद्धति में मूलभूत अंतर है। यह लेख दोनों साहित्यिक धाराओं … आगे पढें

आंबेडकरवादी साहित्य का मूल उद्देश्य

आंबेडकरवादी साहित्य किसी सामाजिक वर्ग, जाति या संख्यात्मक समूह की अभिव्यक्ति तक सीमित साहित्य नहीं है। यह एक मानवतावादी, विवेकशील और सामाजिक न्याय-आधारित वैचारिकी है, जिसका मूल उद्देश्य शोषण, असमानता और अन्याय से मुक्त एक समतामूलक समाज की रचना करना है। यह साहित्य मनुष्य को उसकी मानवीय गरिमा के साथ देखने की दृष्टि विकसित करता … आगे पढें