दलित साहित्य बनाम आंबेडकरवादी साहित्य : नामकरण नहीं, वैचारिक उत्तरदायित्व का प्रश्न
समकालीन हिंदी साहित्य में “दलित साहित्य” शब्द एक स्थापित पहचान बन चुका है। किंतु इसी के समानांतर “आंबेडकरवादी साहित्य” की अवधारणा अब भी अस्पष्ट, उपेक्षित और अक्सर भ्रमित की गयी श्रेणी बनी हुई है। अनेक लेखक स्वयं को दलित साहित्यकार कहते हैं, डॉ. आंबेडकर का संदर्भ लेते हैं, किंतु न तो वे आंबेडकरवादी वैचारिक परंपरा … आगे पढें