यह एक संपादकीय लेख है, जो ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका के खंड 1, अंक 1 | अक्टूबर-दिसंबर 2021 में प्रकाशित है। मूल लेख यहाँ प्रस्तुत है।

आंबेडकर-मिशन के प्रचार-प्रसार हेतु सबसे सशक्त साहित्यिक विधा है- ‘गीत’

— देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
संपादक, 'आंबेडकरवादी साहित्य' पत्रिका

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर,
लोग साथ आते गये और कारवाँ बनता गया।

मजरूह सुल्तानपुरी ने किसे ध्यान में रखकर यह शेर लिखा है? यह तो पता नहीं, लेकिन यह शेर तथागत बुद्ध, संत रैदास, संत कबीर, महामना ज्योतिराव फुले और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर आदि महापुरुषों के व्यक्तित्व पर पूरी तरह लागू होता है। ये सभी महापुरुष अपने-अपने मार्ग पर अकेले ही चले थे और कालांतर में हजारों-लाखों लोग उनके अनुयायी हो गये। इन सभी महापुरुषों का जीवन दर्शन और मिशन भले ही अलग-अलग शाखाओं के रूप में दिखाई दे रहे हों, लेकिन उनका आधार एक ही जड़ से जुड़ा हुआ है। इसलिए इनके मिशन को अलग-अलग नाम देने की बजाय केवल एक ही नाम देना पर्याप्त है, वह नाम है- ‘आंबेडकर-मिशन’। अपने आलोचना-ग्रंथ ‘आंबेडकरवादी कविता के प्रतिमान’ में मैंने इस तथ्य का स्पष्टीकरण कर दिया है कि आंबेडकर-मिशन अर्थात् आंबेडकरवादी विचारधारा के अंतर्गत बुद्ध, रैदास, कबीर, फुले आदि अनेक महापुरुषों की विचारधारा का समावेश है। यही कारण है कि आंबेडकरवादी लोग इन सभी महापुरुषों का और अलग-अलग रंग अपनाने वाले इनके सभी अनुयायियों का समान भाव से सम्मान करते हैं।

आंबेडकर-मिशन को साहित्य के माध्यम से गति प्रदान करने वाले आंबेडकरवादी साहित्यकार अनेक साहित्यिक विधाओं के द्वारा आंबेडकरवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करते आये हैं, जिनमें गीत-विधा प्रमुख है। ‘गीत’ आंबेडकर-मिशन के प्रचार-प्रसार हेतु सबसे सशक्त साहित्यिक विधा है।

कुछ दशकों से आंबेडकरवादी मिशनरी गीतों के लेखन और गायन की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई है। समाज में आंबेडकरवादी गीतों के नाम से चर्चित मिशनरी गीतों का यदि वर्गीकरण किया जाए, तो वह इस प्रकार होगा :

1. राजनीतिक आंबेडकरवादी गीत
2. सामाजिक आंबेडकरवादी गीत
3. धार्मिक आंबेडकरवादी गीत
4. साहित्यिक आंबेडकरवादी गीत

राजनीतिक आंबेडकरवादी गीतों के अंतर्गत मान्यवर कांशीराम एवं बहन कुमारी मायावती के महिमागान सहित बहुजन समाज पार्टी के प्रचार-प्रसार संबंधी गीतों का लेखन और गायन प्रचलित है। सामाजिक आंबेडकरवादी गीतों के अंतर्गत डॉ० आंबेडकर की जीवनकथा व अन्य बहुजन समाज के महापुरुषों के जीवन-चरित्र तथा सामाजिक बुराइयों, कुरीतियों, अंधविश्वासों आदि को आधार बनाकर लिखी गयी गीतों के गायन और श्रवण का प्रचलन है। धार्मिक आंबेडकरवादी गीतों के अंतर्गत तथागत बुद्ध और डॉ० आंबेडकर के महिमागान तथा बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार संबंधी गीतों का लेखन और गायन प्रचलित है।

साहित्यिक आंबेडकरवादी गीतों के अंतर्गत डॉ० आंबेडकर की जीवनकथा व अन्य बहुजन समाज के महापुरुषों के जीवन-चरित्र तथा सामाजिक बुराइयों, कुरीतियों, अंधविश्वासों आदि को आधार बनाकर लिखे गये गीतों के गायन और श्रवण का प्रचलन है। साहित्यिक आंबेडकरवादी गीतों के अंतर्गत उक्त तीनों प्रकारों में से केवल सामाजिक और धार्मिक चिंतन का मिश्रण होता है। साहित्यिक आंबेडकरवादी गीतों का विषय बहुजन समाज पार्टी के प्रचार-प्रसार अथवा बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम और बहन कुमारी मायावती के यशगान से संबंधित नहीं होता है। लेकिन इस तरह की साहित्यिक आंबेडकरवादी गीतों का अत्यंत अभाव है। इस अभाव की पूर्ति करने के लिए ही एक तुच्छ प्रयास के रूप में वर्तमान अंक को प्रकाशित करने की योजना बनाई गयी। आशा है, साहित्यिक आंबेडकरवादी गीतों की विषय-वस्तु, भाषा-शैली और चिंतन-दृष्टि का स्वरूप निर्धारित करने में इस पत्रिका का वर्तमान अंक सफल सिद्ध होगा।