धम्म-चर्चा धम्म को केवल धार्मिक अवधारणा के रूप में देखने के बजाय उसके सामाजिक, नैतिक और व्यावहारिक पक्षों को समझने की दिशा में ले जाने वाली वैचारिक पुस्तक है। इसमें धम्म से जुड़े उन प्रश्नों पर विचार किया गया है, जिन्हें प्रायः रूढ़ धारणाओं और पूर्वनिर्धारित मान्यताओं के कारण ठीक से समझा नहीं जाता।
पुस्तक धम्म की अवधारणा को तर्क, विवेक और सामाजिक जीवन के संदर्भ में देखने का आग्रह करती है। यहाँ धम्म किसी कर्मकांड, चमत्कार या अंधविश्वास का विषय नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज के आचरण को दिशा देने वाली विचार-दृष्टि के रूप में सामने आता है।
धम्म-चर्चा विशेष रूप से उस दृष्टिकोण को चुनौती देती है, जिसमें धम्म को उसके सामाजिक सरोकारों से अलग करके केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित कर दिया जाता है। पुस्तक धम्म और सामाजिक जीवन के संबंध को समझने के लिए पाठक को वैचारिक आधार प्रदान करती है।
🔹 पुस्तक क्यों पढ़ें?
> धम्म की तर्कपूर्ण और विवेकसम्मत समझ विकसित करने के लिए
> धम्म के सामाजिक एवं व्यावहारिक पक्ष को समझने के लिए
> प्रचलित भ्रांतियों और सीमित धारणाओं पर विचार करने के लिए
> धम्म को जीवन और सामाजिक व्यवहार से जोड़कर देखने के लिए
> आंबेडकरवादी दृष्टि से धम्म की भूमिका को समझने के लिए
📖 पुस्तक विवरण
पुस्तक : धम्म-चर्चा
भाषा : हिंदी
स्वरूप : वैचारिक एवं विश्लेषणात्मक
लेखक : देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
प्रकाशन : आंबेडकरवादी साहित्य प्रकाशन
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धम्म को समझना केवल उसके बारे में जानना नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और व्यावहारिक अर्थ को समझना भी है—‘धम्म-चर्चा’ इसी समझ की दिशा में एक वैचारिक पाठ है।