‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका शोध एवं साहित्यिक प्रकाशन में अकादमिक गंभीरता, वैचारिक स्पष्टता, तथ्यपरकता, पारदर्शिता तथा संपादकीय सत्यनिष्ठा को महत्व देती है। पत्रिका में प्राप्त सामग्री का मूल्यांकन उसकी गुणवत्ता, मौलिकता, वैचारिक दृष्टि और अकादमिक अनुशासन के आधार पर किया जाता है।
1. प्रकाशन नैतिकता
पत्रिका शोध एवं साहित्यिक प्रकाशन में ईमानदारी, पारदर्शिता तथा अकादमिक सत्यनिष्ठा के सिद्धांतों का पालन करती है। प्रकाशित सामग्री की वैचारिक, संदर्भगत एवं तथ्यात्मक प्रामाणिकता को विशेष महत्व दिया जाता है।
2. साहित्यिक चोरी नीति
• प्रस्तुत लेख मौलिक एवं अप्रकाशित होना अनिवार्य है।
• लेखों में अनावश्यक अथवा अनुचित समानता स्वीकार्य नहीं होगी। सामान्यतः 15% से अधिक समानता वाले लेखों की विशेष समीक्षा की जाएगी।
• साहित्यिक चोरी, अनधिकृत उद्धरण अथवा स्रोत-संबंधी गंभीर अनियमितता पाए जाने पर लेख अस्वीकृत किया जा सकता है।
3. समीक्षकीय प्रक्रिया
पत्रिका में प्राप्त शोध-पत्रों का समीक्षकीय परीक्षण Double Blind Peer Review प्रणाली के अंतर्गत किया जाता है। समीक्षकीय प्रक्रिया के दौरान, जहाँ लागू हो, लेखक एवं समीक्षक की पहचान गोपनीय रखी जाती है। समीक्षा के आधार पर संशोधन, पुनर्समीक्षा अथवा अस्वीकृति का निर्णय लिया जा सकता है।
4. कॉपीराइट एवं प्रकाशन अधिकार
प्रकाशित रचना के संबंध में कॉपीराइट एवं पुनर्प्रकाशन से जुड़े अधिकार पत्रिका की स्वीकृत प्रकाशन-शर्तों के अनुसार निर्धारित होंगे। लेखक द्वारा प्रस्तुत रचना के संबंध में यह अपेक्षित है कि उसके प्रकाशन के लिए आवश्यक अधिकार लेखक के पास हों तथा रचना किसी अन्य प्रकाशन के अधिकारों का उल्लंघन न करती हो।
5. निष्पक्षता नीति
पत्रिका जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र अथवा जन्माधारित पहचान के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करती। रचनाओं का मूल्यांकन उनके वैचारिक स्वरूप, अकादमिक गुणवत्ता, सामाजिक दृष्टि, तार्किक आधार एवं विषयगत प्रासंगिकता के आधार पर किया जाता है।
6. विषयगत नीति
‘आंबेडकरवादी साहित्य’ का मूल आधार आंबेडकर-दर्शन है। पत्रिका में शोध-पत्रों एवं लेखों का चयन केवल विषय की व्यापकता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी वैचारिक दृष्टि, विश्लेषणात्मक गंभीरता और सामाजिक प्रासंगिकता के आधार पर किया जाता है।
पत्रिका में साहित्य, शिक्षा, समाज, राजनीति, संविधान, बुद्ध-धम्म, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान एवं समकालीन सामाजिक-विमर्श आदि विभिन्न विषयों से संबंधित लेखन प्रकाशित किया जा सकता है, बशर्ते उसका विश्लेषण आंबेडकरवादी दृष्टि पर आधारित हो।
साहित्य के क्षेत्र में कविता, कहानी, उपन्यास, आत्मकथा, नाटक, संस्मरण आदि के आंबेडकरवादी अध्ययन तथा साहित्यिक आलोचना को स्थान दिया जाता है। इसी प्रकार शिक्षा, सामाजिक न्याय, जाति-व्यवस्था, मानवाधिकार, लोकतंत्र, संविधान, बुद्ध-धम्म, वैज्ञानिक चेतना और समकालीन सामाजिक प्रश्नों से संबंधित शोधपरक एवं आलोचनात्मक लेखन भी स्वीकार्य है।
पत्रिका किसी जाति, वर्ग, धर्म, लिंग अथवा समुदाय विशेष के साहित्यकारों के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखती। लेखन का मूल्यांकन जन्माधारित पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक स्पष्टता, तार्किकता, तथ्यात्मक प्रामाणिकता, सामाजिक दृष्टि और अकादमिक गुणवत्ता के आधार पर किया जाता है।
केवल वर्णनात्मक, भावनात्मक, नारेबाज़ीपूर्ण, अप्रमाणित अथवा वैचारिक विश्लेषण से रहित सामग्री को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। किसी विषय का मात्र आंबेडकर से संबंध होना पर्याप्त नहीं है; उसमें आंबेडकरवादी दृष्टि का सार्थक और तार्किक विवेचन अपेक्षित है।
“पत्रिका में विषय नहीं, दृष्टि निर्णायक है।”
पत्रिका का उद्देश्य विभिन्न ज्ञान-क्षेत्रों को एक ऐसी वैचारिक धारा से जोड़ना है, जो समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, न्याय, मानव गरिमा और वैज्ञानिक विवेक को महत्व देती है।
7. पत्रिका के स्थायी स्तंभ
संपादकीय निर्णय
पत्रिका का संपादकीय मंडल प्राप्त सामग्री के चयन, समीक्षा, संशोधन, संपादन तथा प्रकाशन के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता है। किसी रचना का प्राप्त होना उसके प्रकाशन की स्वीकृति नहीं माना जाएगा।