आंबेडकरवादी साहित्य का घोषणा-पत्र

आंबेडकरवादी साहित्य, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की मानवतावादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित एक वैचारिक एवं साहित्यिक मंच है। डॉ. आंबेडकर की विचारधारा का स्वरूप अत्यंत व्यापक और समन्वयी है, जिसमें तथागत बुद्ध, संत कबीर, संत रविदास, संत गाडगे, नारायण गुरु, पेरियार रामास्वामी, तथा ज्योतिराव फुले जैसे महापुरुषों के दर्शन का सम्यक समावेश है।

इसी व्यापक वैचारिक परंपरा को दृष्टिगत रखते हुए ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ का यह घोषणा-पत्र प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रस्तुत लेख ‘आंबेडकरवादी साहित्य का घोषणा-पत्र’ उसी वैचारिक चेतना का उद्घोष है, जिसमें आंबेडकरवादी साहित्य की संकल्पना, उद्देश्य और दायित्व को स्पष्ट रूप में रेखांकित किया गया है।

👇 आंबेडकरवादी साहित्य : स्मरणीय बिंदु

(1) आंबेडकरवाद का पोषक साहित्य

आंबेडकरवादी साहित्य ‘आंबेडकरवाद’ का पोषक है। यहाँ ‘आंबेडकरवाद’ का अर्थ है—आंबेडकर का कथन, अर्थात आंबेडकर-दर्शन। आंबेडकर-दर्शन डॉ. आंबेडकर की विचारधारा का समग्र रूप है, जिसमें बुद्ध-वाणी, रविदास-वाणी तथा अन्य सत्यशोधक परंपराओं का अंतर्भाव है।

(2) मानवीय मूल्यों की वैचारिक संरचना

अनीश्वरवाद, अनात्मवाद, दुखवाद, प्रतीत्य-समुत्पाद, समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, न्याय, प्रज्ञा, करुणा, शील और मैत्री—ये सभी सिद्धांत आंबेडकर-दर्शन के अनिवार्य अंग हैं। अतः इन मूल्यों का आंबेडकरवादी साहित्य से घनिष्ठ और स्वाभाविक संबंध है।

(3) चेतना का प्रेरक साहित्य

आंबेडकरवादी साहित्य सामाजिक, शैक्षिक, राष्ट्रीय एवं वैज्ञानिक चेतना का प्रेरक साहित्य है। यह साहित्य अंध-आस्था, रूढ़ि और अवैज्ञानिक दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करता।

(4) तथ्यपरकता और प्रामाणिकता

आंबेडकरवादी साहित्य समाज और संस्कृति से संबंधित तथ्यपूर्ण, प्रामाणिक और विवेकसम्मत बातों तथा घटनाओं के वर्णन हेतु प्रतिबद्ध है।

(5) मानवीय करुणा की आधारशिला

आंबेडकरवादी साहित्य तथागत बुद्ध की प्रेरक वाणी— “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, लोकानुकंपाय”—पर आधारित है। ‘मूलनिवासी’ अथवा ‘पंद्रह–पचासी’ जैसी अवधारणाओं से इसका कोई संबंध नहीं है।

(6) भाषाई और सामाजिक समावेशन

आंबेडकरवादी साहित्य में हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के सम्यक साहित्य को सम्मिलित किया जा सकता है— चाहे रचनाकार किसी भी वर्ग, जाति या धर्म से संबंधित हो।

(7) संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप

आंबेडकरवादी साहित्य भारतीय संविधान में वर्णित सम्यक प्रावधानों— समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय—के अनुरूप रचा जाने वाला साहित्य है।

(8) विवेचन, न कि निंदा

आंबेडकरवादी साहित्य किसी धर्म अथवा दर्शन की निंदा नहीं करता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उनका सम्यक, तर्कसंगत और आलोचनात्मक विवेचन करता है।

(9) सत्यशोधक परंपरा का अंतर्भाव

इस साहित्य में तथागत बुद्ध, संत कबीर, संत रविदास, संत गाडगे, नारायण गुरु, पेरियार रामास्वामी, ज्योतिराव फुले एवं डॉ. आंबेडकर जैसे सत्यशोधक महापुरुषों की सम्यक वाणी का अंतर्भाव है।

(10) चेतना का प्रशस्ति-पत्र

आंबेडकरवादी साहित्य आंबेडकरवादी चेतना से जुड़े साहित्यकारों, शिक्षकों, समाजसेवकों एवं संस्कृति के संरक्षकों का प्रशस्ति-पत्र है।

(यह घोषणा-पत्र संपादकीय उत्तरदायित्व में जारी किया गया है।)

— (हस्ताक्षर)
देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
संपादक,
आंबेडकरवादी साहित्य

📃 पत्रिका परिचय

☸ आंबेडकरवादी साहित्य

(आंबेडकर-दर्शन पर आधारित हिंदी त्रैमासिक शोध पत्रिका)

PEER-REVIEWED (REFEREED) JOURNAL

RNI पंजीकरण संख्या : UPHIN/2021/89341

आरंभ वर्ष : अक्टूबर–दिसंबर 2021

आवृत्ति : त्रैमासिक (Quarterly)

विषय : साहित्य (Literature)

भाषा : हिंदी (Hindi)

प्रकाशन-स्थल : शी-19/100, भीम नगर कॉलोनी, वरुणा गार्डन के पास, कचहरी, वाराणसी, उत्तर प्रदेश – 221002

📝 संपादकीय सूचना

यह घोषणा-पत्र ‘आंबेडकरवादी साहित्य’ पत्रिका की स्थायी वैचारिक नीति का प्रतिनिधित्व करता है तथा पत्रिका के प्रत्येक अंक में अनिवार्य रूप से प्रकाशित किया जाता है।

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