‘आंबेडकरवादी साहित्य’ एक वैचारिक, आलोचनात्मक एवं शोधपरक त्रैमासिक हिंदी पत्रिका है, जिसका मूल आधार आंबेडकर-दर्शन है। पत्रिका का उद्देश्य विभिन्न ज्ञान-क्षेत्रों में आंबेडकरवादी दृष्टि की स्थापना, स्पष्टता और विस्तार करना है।
इस पत्रिका में शोध-पत्रों का चयन विषय की व्यापकता के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक स्थिति और दृष्टिकोण के आधार पर किया जाता है। अतः केवल वही शोध-पत्र स्वीकार्य होंगे, जिनका विश्लेषण आंबेडकरवादी दृष्टि पर आधारित हो।
🔹 स्वीकृत विषय-क्षेत्र
पत्रिका में निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित शोध-पत्र प्रकाशित किए जा सकते हैं, बशर्ते उनका विश्लेषण आंबेडकरवादी दृष्टि पर आधारित हो:
1. साहित्य
आंबेडकरवादी साहित्य की अवधारणा, स्वरूप और प्रतिमान। कविता, कहानी, उपन्यास, आत्मकथा आदि का आंबेडकरवादी विश्लेषण।
2. शिक्षा
शिक्षा में समानता, अवसर और संरचनात्मक प्रश्न। आंबेडकर के शैक्षिक विचार और उनकी समकालीन प्रासंगिकता।
3. समाज
जाति-व्यवस्था, सामाजिक संरचना और असमानता। सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और परिवर्तन के प्रश्न।
4. राजनीति
संविधान, लोकतंत्र और प्रतिनिधित्व। नीतियाँ, शासन और राजनीतिक संरचनाओं का विश्लेषण।
5. धर्म
बुद्ध-धम्म और आंबेडकरवादी धार्मिक चिंतन। धर्म की आलोचना और वैचारिक पुनर्परिभाषा।
🔹 अस्वीकृत विषय-वस्तु
निम्न प्रकार की सामग्री पत्रिका में स्वीकार्य नहीं होगी:
• केवल वर्णनात्मक या सामान्य विषय-वस्तु, जिसमें वैचारिक विश्लेषण का अभाव हो।
• ऐसे लेख, जिनका आंबेडकरवादी दृष्टि से कोई संबंध न हो।
• भावनात्मक, नारेबाज़ीपूर्ण या अकादमिक अनुशासन से रहित लेखन।
🔹 मूल सिद्धांत
“पत्रिका में विषय नहीं, दृष्टि निर्णायक है।” अतः प्रत्येक शोध-पत्र में वैचारिक स्पष्टता, विश्लेषणात्मक गंभीरता और अकादमिक अनुशासन अनिवार्य है।
🔹 समापन कथन
“आंबेडकरवादी साहित्य” विभिन्न विषयों को एक वैचारिक धारा में जोड़ने का कार्य करता है, जहाँ प्रत्येक लेख केवल जानकारी नहीं, बल्कि विचार की दिशा प्रस्तुत करता है।
सादर,
देवचंद्र भारती ‘प्रखर’
प्रधान संपादक, आंबेडकरवादी साहित्य
दिनांक: 01 अप्रैल 2026